Saab 900: 90s की ऐसी Futuristic Car जिसमें था Night Panel और Center Key

जब हम futurजब भी हम फ्यूचरिस्टिक कारों की बात करते हैं, तो दिमाग में सीधे इलेक्ट्रिक गाड़ियां, टचस्क्रीन वाले डिजिटल डैशबोर्ड और ऑटोमैटिक फीचर्स घूमने लगते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि 90 के दशक में ही स्वीडन की एक ऐसी कार आ चुकी थी, जिसके आइडियाज आज भी एकदम फ्यूचर वाले लगते हैं?

हम बात कर रहे हैं Saab 900 की। Saab कंपनी ने सिर्फ स्पीड और लुक पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि ड्राइवर के आराम, सेफ्टी और सड़क पर साफ दिखने (विजिबिलिटी) को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे अनोखे बदलाव किए जो उस दौर में किसी ने सोचे भी नहीं थे।

Saab 900 आख़िर क्या थी?

Saab 900 स्वीडिश कार कंपनी Saab का एक सुपरहिट मॉडल था। इसकी पहली पीढ़ी 1978 में बाजार में आई थी और बाद में इसके कई नए मॉडल उतारे गए।

खास बात यह थी कि इस कंपनी का बैकग्राउंड हवाई जहाज (Aviation) बनाने का भी था। इसलिए इनकी कारों की इंजीनियरिंग में प्लेन वाली सोच साफ दिखती थी। इनका पूरा फोकस सेफ्टी और ड्राइवर को ध्यान में रखकर डिजाइन बनाने पर रहता था।

1. नाइट पैनल (Night Panel): रात में बेफालतू की लाइट से मुक्ति

Saab 900 का सबसे जबरदस्त फीचर था Night Panel

रात में गाड़ी चलाते वक्त डैशबोर्ड की ढेर सारी जगमगाती लाइटें ड्राइवर का ध्यान भटका सकती हैं। Saab ने इसका तोड़ निकाला। नाइट पैनल का बटन दबाते ही डैशबोर्ड की बेफालतू की लाइटें बंद या धीमी हो जाती थीं और सिर्फ स्पीडोमीटर जैसे जरूरी मीटर ही जलते रहते थे।

यह बिल्कुल वैसा ही आइडिया है जैसा आज की मॉडर्न कारों में स्क्रीन का डिम मोड या मिनिमल डिस्प्ले मोड होता है।

2. चाबी लगाने की अजीब लेकिन काम की जगह

आम तौर पर कारों में चाबी स्टेयरिंग के पास या नीचे लगती है, लेकिन Saab 900 में इग्निशन की (Ignition Key) गियर लीवर के पास, सेंटर कंसोल में दी गई थी।

पहली बार देखने में यह काफी अजीब लगता था, लेकिन यह Saab की पहचान बन गया। इससे फायदा यह हुआ कि एक्सीडेंट के वक्त स्टेयरिंग के नीचे पैर या घुटना टकराकर जख्मी होने का खतरा काफी कम हो जाता था।

3. ड्राइवर पर फोकस डैशबोर्ड

Saab 900 का डैशबोर्ड ड्राइवर की तरफ थोड़ा मुड़ा हुआ रहता था। सारे बटन और कंट्रोल इस तरह सेट किए गए थे कि ड्राइवर बिना भटके और बिना हाथ ज्यादा फैलाए आसानी से उन्हें दबा सके।

आज के टाइम में भी बड़ी-बड़ी कार कंपनियां इसी ह्यूमन-मशीन इंटरफेस (HMI) डिजाइन पर काम करती हैं।

4. हवाई जहाज वाली सोच

चूंकि Saab का इतिहास फाइटर जेट और प्लेन बनाने से जुड़ा था, इसलिए कार के कॉकपिट (अंदरूनी हिस्से) में भी वही प्लेन वाला फील आता था। इसका मतलब यह नहीं था कि इसमें कोई जेट इंजन लगा था, बल्कि सोच यह थी कि प्लेन के पायलट की तरह कार के ड्राइवर को भी हर जानकारी एकदम साफ और बिना किसी दिक्कत के मिलनी चाहिए।

5. सेफ्टी में कोई समझौता नहीं

Saab की गाड़ियां अपनी मजबूती और सेफ्टी के लिए जानी जाती थीं। मजबूत पैसेंजर केबिन और अंदरूनी सुरक्षा ढांचा ऐसा था जो उस दौर की बाकी कारों से इसे काफी आगे रखता था।

क्या Saab 900 वाकई अपने समय से आगे थी?

देखा जाए तो 90 के दशक की टेक्नोलॉजी और आज की टचस्क्रीन-AI वाली गाड़ियों में जमीन-आसमान का फर्क है। लेकिन Saab 900 के कॉन्सेप्ट—जैसे रात में बेकार की लाइटें बंद करना और ड्राइवर के आराम के हिसाब से बटन लगाना—आज के डिजाइनिंग के नियमों से पूरी तरह मेल खाते हैं।

Saab 900 आज भी क्यों खास है?

आज जब दुनिया इलेक्ट्रिक और ऑटोमैटिक गाड़ियों की तरफ भाग रही है, Saab 900 हमें याद दिलाती है कि नयापन सिर्फ स्क्रीन या चिप्स लगाने से नहीं आता। कभी-कभी एक छोटा-सा सही डिजाइन बदलाव भी ड्राइविंग का पूरा अनुभव बदल सकता है।

यही वजह है कि इतने सालों बाद भी दुनिया भर के कार प्रेमी Saab 900 की बातें करना पसंद करते हैं।

आख़िरी बात

Saab 900 90 के दशक की उन चुनिंदा कारों में से थी जिसने लीक से हटकर सोचना शुरू किया। इसका नाइट पैनल और अलग तरह का इंटीरियर आज भी फ्यूचरिस्टिक लगता है। यह कार साबित करती है कि बेहतरीन इंजीनियरिंग सिर्फ नई तकनीक ठूंसने का नाम नहीं है, बल्कि ड्राइवर को एक सुरक्षित और शांत ड्राइविंग एक्सपीरियंस देने का नाम है।

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