Why Ships Don’t Cover Grain from Birds? | बड़े जहाजों में अनाज को पक्षियों से क्यों नहीं बचाया जाता

जब विशाल समुद्री जहाजों में हज़ारों टन अनाज एक देश से दूसरे देश भेजा जाता है, तब एक सवाल लगभग हर किसी के मन में आता है—इतना खुला अनाज पक्षियों से क्यों नहीं ढका जाता?
पहली नज़र में यह लापरवाही लगती है, लेकिन इसके पीछे गहरा विज्ञान और समुद्री अनुभव छिपा है।

1. अनाज को “सांस लेने” की ज़रूरत होती है

अनाज कोई निर्जीव वस्तु नहीं है। इसमें नमी और तापमान का संतुलन बेहद ज़रूरी होता है।
अगर अनाज को जाल या प्लास्टिक शीट से पूरी तरह ढक दिया जाए, तो अंदर नमी फँस जाती है, जिससे फंगस और सड़न शुरू हो सकती है।

2. Bulk Carrier जहाजों का वेंटिलेशन सिस्टम

अनाज ले जाने वाले जहाजों को Bulk Carrier कहा जाता है।
इनमें विशेष वेंटिलेशन सिस्टम होता है, जो हवा के प्रवाह को बनाए रखता है।
जाल लगाने से यह सिस्टम बाधित हो सकता है, जिससे अनाज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

3. पक्षियों से होने वाला नुकसान बहुत कम

आम धारणा के विपरीत, पक्षी अनाज का बहुत छोटा हिस्सा ही नुकसान करते हैं।
यह नुकसान कुल अनाज का नगण्य प्रतिशत होता है, जबकि ढकने से होने वाला नुकसान कहीं ज़्यादा हो सकता है।

4. अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियम और मानक

International Maritime Organization (IMO) जैसे संस्थान अनाज को पूरी तरह ढकने की सलाह नहीं देते।
कारण है—सुरक्षा, गुणवत्ता और जहाज की स्थिरता।

5. सुरक्षा और व्यावहारिक जोखिम

तेज़ समुद्री हवाओं में जाल या कवर उड़ सकते हैं, फट सकते हैं या जहाज की मशीनरी में फँस सकते हैं।
इससे दुर्घटना और जान-माल के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

6. लागत और समय का मुद्दा

हज़ारों टन अनाज को ढकने और हर पोर्ट पर खोलने–बंद करने में भारी लागत और समय लगता है, जो व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।

निष्कर्ष

बड़े जहाजों में अनाज को पक्षियों से न बचाना कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और रणनीतिक निर्णय है।
यह फैसला अनाज की गुणवत्ता, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

यही कारण है कि खुले अनाज से भरे जहाज आज भी वैश्विक व्यापार की रीढ़ बने हुए हैं।

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