तिब्बत की सैंड मंडला (Sand Mandala) कला दुनिया की सबसे रहस्यमयी और आध्यात्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह केवल रंगीन रेत से बनी सुंदर आकृति नहीं होती, बल्कि जीवन, ब्रह्मांड और मानव चेतना का प्रतीक होती है। इस कला को बौद्ध भिक्षु अत्यंत धैर्य, अनुशासन और ध्यान की अवस्था में तैयार करते हैं।
सैंड मंडला क्या होती है?
सैंड मंडला रंगीन रेत से बनाई गई एक जटिल ज्यामितीय आकृति होती है। इसे आमतौर पर बौद्ध मठों में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बनाया जाता है।
मंडला का प्रत्येक आकार, रेखा और रंग किसी न किसी आध्यात्मिक तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे करुणा, शांति, संतुलन और ऊर्जा।
चक पुर (Chak Pur) का अर्थ क्या है?
चक पुर तिब्बती भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है —
“रेत से बना हुआ ब्रह्मांड”
चक पुर यह दर्शाता है कि पूरा ब्रह्मांड भी उतना ही अस्थायी है जितना रेत का एक कण। यह जीवन की नश्वरता और परिवर्तनशीलता को समझाने का एक गहरा माध्यम है।
सैंड मंडला बनाने की प्रक्रिया
सैंड मंडला बनाना आसान काम नहीं है। इसमें कई दिन या कभी-कभी हफ्तों का समय लग जाता है।
- भिक्षु धातु की पतली नलियों (चाक-पुर्स) से रेत के कण धीरे-धीरे गिराते हैं
- पूरा काम ध्यान और मौन में किया जाता है
- एक छोटी सी गलती पूरी आकृति बिगाड़ सकती है
- यह प्रक्रिया मानसिक एकाग्रता और आत्म-नियंत्रण का अभ्यास होती है
मंडला को पूरा होने के बाद नष्ट क्यों किया जाता है?
यह सवाल सबसे ज़्यादा लोगों को हैरान करता है। इतनी मेहनत और सुंदरता के बाद भी मंडला को जानबूझकर नष्ट कर दिया जाता है।
इसका कारण है बौद्ध दर्शन का मूल सिद्धांत —
अनित्यता (Impermanence)
बौद्ध धर्म के अनुसार:
- कुछ भी स्थायी नहीं है
- सुख, दुख, धन, सफलता – सब अस्थायी हैं
- किसी भी चीज़ से अत्यधिक लगाव दुःख का कारण बनता है
मंडला को नष्ट करके भिक्षु यह सिखाते हैं कि हमें जीवन में आसक्ति छोड़नी चाहिए।
रेत को पानी में प्रवाहित करने का अर्थ
मंडला को नष्ट करने के बाद उसकी रेत को किसी नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाता है।
इसका अर्थ है:
- शांति और सकारात्मक ऊर्जा को पूरे संसार में फैलाना
- प्रकृति के साथ एकरूप होना
- व्यक्तिगत लाभ के बजाय सार्वभौमिक कल्याण
सैंड मंडला का सार्वभौमिक संदेश
सैंड मंडला हमें कई महत्वपूर्ण जीवन-संदेश देती है:
- जीवन क्षणभंगुर है
- सुंदरता स्थायी नहीं होती
- अहंकार और स्वामित्व छोड़ना आवश्यक है
- परिवर्तन को स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है
यह कला हमें सिखाती है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आंतरिक समझ में है।
निष्कर्ष
तिब्बत की सैंड मंडला और चक पुर केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को देखने का एक दर्शन है।
रेत से बना ब्रह्मांड और फिर उसका विसर्जन हमें याद दिलाता है कि हम भी इस संसार में अस्थायी यात्री हैं।
जो बदलता है, वही सत्य है।