इंडस्ट्री में किसी भी प्रोडक्ट की क्वालिटी सिर्फ उसके रंग या स्वाद से नहीं, बल्कि उसके अंदर मौजूद कणों (particles) की महीनता से भी तय होती है। पेंट, प्रिंटिंग इंक और चॉकलेट जैसे प्रोडक्ट्स में अगर कण बड़े या असमान हों, तो फिनिश खराब हो सकती है। इसी समस्या को जांचने के लिए एक खास उपकरण इस्तेमाल किया जाता है, जिसे हेगमैन गेज या ग्राइंडोमीटर कहा जाता है।
हेगमैन गेज एक प्रिसिजन मेजरिंग टूल है जो लिक्विड या सेमी-लिक्विड पदार्थों में मौजूद कणों का आकार और उनकी डिस्पर्शन क्वालिटी मापता है। इसे खासतौर पर पेंट इंडस्ट्री, प्रिंटिंग इंडस्ट्री और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में उपयोग किया जाता है।
हेगमैन गेज का डिजाइन और संरचना
हेगमैन गेज आमतौर पर स्टेनलेस स्टील का बना एक फ्लैट प्लेट होता है, जिसके ऊपर एक लंबा ग्रूव (नाली) बना होता है। यह ग्रूव एक तरफ से गहरा और दूसरी तरफ से धीरे-धीरे उथला होता जाता है। इसके साथ एक स्केल भी बना होता है जो माइक्रोन या हेगमैन यूनिट में माप दिखाता है।
इसके साथ एक स्क्रेपर या ब्लेड दिया जाता है, जिससे टेस्ट करने वाला पदार्थ ग्रूव पर फैलाया जाता है।
हेगमैन गेज कैसे काम करता है? (Working Principle)
हेगमैन गेज का काम करने का तरीका बहुत सरल लेकिन प्रभावी है।
- सबसे पहले टेस्ट किया जाने वाला पदार्थ (जैसे पेंट या इंक) ग्रूव के गहरे हिस्से में डाला जाता है।
- फिर स्क्रेपर की मदद से इसे एक ही स्ट्रोक में पूरे ग्रूव पर फैला दिया जाता है।
- जैसे-जैसे पदार्थ उथले हिस्से की तरफ जाता है, बड़े कण सतह पर दिखने लगते हैं।
- जहां से कण या लाइनें दिखना शुरू होती हैं, वहीं का स्केल रीडिंग नोट की जाती है।
यह रीडिंग बताती है कि उस पदार्थ में मौजूद कण कितने बड़े हैं और डिस्पर्शन कितना अच्छा है।
पेंट इंडस्ट्री में उपयोग
पेंट बनाते समय उसमें पिगमेंट, रेजिन और सॉल्वेंट मिलाए जाते हैं। अगर पिगमेंट ठीक से ग्राइंड न हो, तो पेंट में दानेदारपन आ सकता है।
हेगमैन गेज से यह सुनिश्चित किया जाता है कि:
- पेंट की सतह स्मूथ हो
- ब्रशिंग के बाद लाइनें न दिखें
- कोटिंग एकसमान बने
- फिनिश प्रोफेशनल दिखे
अगर रीडिंग खराब आती है, तो पेंट को दोबारा ग्राइंड या मिक्स किया जाता है।
प्रिंटिंग इंक में महत्व
प्रिंटिंग इंक में पार्टिकल साइज बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर कण बड़े होंगे तो:
- प्रिंट धुंधला आ सकता है
- मशीन जाम हो सकती है
- पेपर पर स्पॉट्स आ सकते हैं
हेगमैन गेज से इंक की फाइननेस जांचकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रिंट शार्प और साफ आए।
चॉकलेट इंडस्ट्री में उपयोग
आपने देखा होगा कि अच्छी क्वालिटी की चॉकलेट मुंह में जाते ही स्मूद और क्रीमी लगती है। इसका कारण है उसमें मौजूद कोको और शुगर कणों की बहुत महीन ग्राइंडिंग।
चॉकलेट प्रोसेसिंग में भी ग्राइंडोमीटर का इस्तेमाल किया जाता है ताकि:
- कण बहुत बड़े न रहें
- टेक्सचर स्मूद रहे
- मुंह में किरकिरापन महसूस न हो
इससे प्रीमियम क्वालिटी चॉकलेट तैयार होती है।
हेगमैन स्केल क्या होता है?
हेगमैन गेज में दो तरह की स्केल रीडिंग मिलती है:
- माइक्रोन स्केल – सीधे कणों का आकार दिखाता है
- हेगमैन यूनिट – इंडस्ट्री स्टैंडर्ड फाइननेस स्केल
जितनी ज्यादा हेगमैन वैल्यू होगी, उतना ही फाइन डिस्पर्शन माना जाता है।
हेगमैन गेज के फायदे
आसान और तेज टेस्ट
यह उपकरण कुछ सेकंड में रिजल्ट दे देता है।
सटीक गुणवत्ता नियंत्रण
मैन्युफैक्चरिंग के दौरान तुरंत पता चल जाता है कि प्रोडक्ट सही है या नहीं।
कम लागत वाला उपकरण
यह हाई-टेक मशीन नहीं, बल्कि सरल लेकिन प्रभावी टूल है।
कई इंडस्ट्री में उपयोगी
पेंट, इंक, कोटिंग, कॉस्मेटिक्स, फूड प्रोसेसिंग आदि में इस्तेमाल होता है।
हेगमैन गेज क्यों जरूरी है?
अगर पार्टिकल साइज सही न हो तो:
- पेंट खराब दिखेगा
- इंक प्रिंट खराब करेगी
- चॉकलेट का स्वाद और टेक्सचर बिगड़ जाएगा
- ग्राहक असंतुष्ट होगा
इसलिए इंडस्ट्री में क्वालिटी कंट्रोल के लिए यह टूल बेहद जरूरी माना जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
हेगमैन गेज या ग्राइंडोमीटर भले ही देखने में एक साधारण धातु प्लेट जैसा लगे, लेकिन इंडस्ट्री में इसकी भूमिका बहुत बड़ी है। यह सुनिश्चित करता है कि पेंट स्मूद हो, इंक साफ प्रिंट दे और चॉकलेट क्रीमी बने। सरल डिजाइन, तेज परिणाम और भरोसेमंद माप के कारण यह आज भी मैन्युफैक्चरिंग और लैब टेस्टिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगर आप कभी सोचें कि किसी प्रोडक्ट की फिनिश इतनी परफेक्ट कैसे होती है, तो उसके पीछे इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण टूल का योगदान जरूर होता है।