फॉरेंसिक टीम फिंगरप्रिंट कैसे लेती है? | How Forensic Experts Collect Fingerprints at Crime Scene

जब भी हम किसी क्राइम मूवी या टीवी शो में पुलिस को अपराधी पकड़ते देखते हैं, तो अक्सर एक चीज जरूर दिखाई जाती है — फिंगरप्रिंट। एक छोटा सा उंगली का निशान कई बार पूरे केस को सुलझा देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फॉरेंसिक टीम क्राइम सीन पर फिंगरप्रिंट आखिर लेती कैसे है? इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में पूरी प्रक्रिया समझेंगे।

फिंगरप्रिंट क्या होता है और यह क्यों खास होता है?

फिंगरप्रिंट हमारी उंगलियों की त्वचा पर बने यूनिक पैटर्न होते हैं। ये पैटर्न जन्म से ही अलग-अलग होते हैं और जीवनभर लगभग नहीं बदलते। दुनिया में दो लोगों के फिंगरप्रिंट कभी एक जैसे नहीं होते। इसी कारण इन्हें पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

जब कोई व्यक्ति किसी चीज को छूता है, तो उसकी त्वचा से निकलने वाला पसीना और तेल सतह पर एक हल्का निशान छोड़ देता है। यही निशान फॉरेंसिक टीम के लिए महत्वपूर्ण सबूत बन जाता है।

फिंगरप्रिंट के प्रकार

क्राइम सीन पर मिलने वाले फिंगरप्रिंट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

  1. पेटेंट फिंगरप्रिंट – ये स्पष्ट दिखाई देते हैं, जैसे खून, स्याही या मिट्टी में बने निशान।
  2. प्लास्टिक फिंगरप्रिंट – नरम सतह जैसे मोम, साबुन या गीली मिट्टी पर बने उभरे हुए निशान।
  3. लेटेंट फिंगरप्रिंट – ये सबसे आम और अदृश्य होते हैं, जिन्हें देखने के लिए वैज्ञानिक तरीकों की जरूरत पड़ती है।

क्राइम सीन पर फिंगरप्रिंट ढूंढने की प्रक्रिया

1. सतह की जांच (Surface Inspection)

सबसे पहले फॉरेंसिक विशेषज्ञ पूरे क्राइम सीन का निरीक्षण करते हैं। वे दरवाजे के हैंडल, मोबाइल, ग्लास, टेबल, हथियार या खिड़की जैसी जगहों पर ध्यान देते हैं, क्योंकि यहां फिंगरप्रिंट मिलने की संभावना ज्यादा होती है।

2. पाउडर डस्टिंग मेथड (Powder Method)

यह सबसे लोकप्रिय तरीका है। इसमें विशेषज्ञ एक खास ब्रश से काले या सफेद रंग का फिंगरप्रिंट पाउडर सतह पर हल्के से लगाते हैं।
पाउडर केवल उस जगह चिपकता है जहां पसीना या तेल का निशान होता है, जिससे फिंगरप्रिंट साफ दिखाई देने लगता है।

इसके बाद उस प्रिंट को पारदर्शी टेप से उठाकर विशेष कार्ड पर चिपका लिया जाता है। इसे फिंगरप्रिंट लिफ्टिंग कहते हैं।

3. केमिकल मेथड (Chemical Method)

कुछ सतहों जैसे कागज या लकड़ी पर पाउडर काम नहीं करता। ऐसे में फॉरेंसिक टीम विशेष रसायनों का उपयोग करती है।

  • निनहाइड्रिन – यह कागज पर मौजूद अमीनो एसिड से प्रतिक्रिया करके बैंगनी रंग का प्रिंट दिखाता है।
  • साइनोएक्रिलेट फ्यूमिंग (Super Glue Method) – इसमें धुएं की मदद से फिंगरप्रिंट सफेद रंग में उभर आता है।

ये तरीके छिपे हुए फिंगरप्रिंट को भी स्पष्ट बना देते हैं।

4. अल्ट्रावायलेट और लेजर लाइट

कई बार फिंगरप्रिंट को देखने के लिए UV या लेजर लाइट का इस्तेमाल किया जाता है। खास रोशनी में प्रिंट चमकने लगता है और कैमरे से उसकी फोटो ले ली जाती है।

5. डिजिटल स्कैनिंग और रिकॉर्डिंग

आजकल आधुनिक तकनीक में फिंगरप्रिंट को हाई-रेजोल्यूशन कैमरे या स्कैनर से रिकॉर्ड किया जाता है।
इसके बाद इन प्रिंट्स को कंप्यूटर सिस्टम में डालकर डेटाबेस से मिलाया जाता है।

पुलिस के पास विशाल डिजिटल सिस्टम होता है जिसे AFIS (Automated Fingerprint Identification System) कहा जाता है। यह सिस्टम लाखों फिंगरप्रिंट्स से तुलना करके संभावित मैच खोजता है।

फिंगरप्रिंट से अपराधी कैसे पकड़ा जाता है?

जब क्राइम सीन से मिला फिंगरप्रिंट किसी संदिग्ध व्यक्ति के रिकॉर्ड से मेल खा जाता है, तो यह मजबूत सबूत बन जाता है। अदालत में भी फिंगरप्रिंट को विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है।

हालांकि सिर्फ फिंगरप्रिंट ही काफी नहीं होता, बल्कि इसे अन्य सबूतों जैसे DNA, गवाह और CCTV फुटेज के साथ जोड़ा जाता है।

क्या फिंगरप्रिंट हमेशा मिल जाते हैं?

नहीं। कई बार सतह खराब होने, बारिश, धूल, आग या समय बीत जाने से फिंगरप्रिंट मिट सकते हैं।
कुछ अपराधी दस्ताने पहनकर भी अपराध करते हैं, जिससे फिंगरप्रिंट नहीं मिलते। लेकिन फिर भी विशेषज्ञ कई बार सूक्ष्म निशानों से सुराग निकाल लेते हैं।

निष्कर्ष

फॉरेंसिक विज्ञान में फिंगरप्रिंट लेना एक बेहद महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। पाउडर, केमिकल, लाइट और डिजिटल तकनीक की मदद से अदृश्य निशानों को भी देखा और सुरक्षित किया जा सकता है। यही छोटे-छोटे निशान कई बार बड़े अपराधों को सुलझाने की कुंजी बन जाते हैं।

अगली बार जब आप किसी चीज को छुएं, तो याद रखें — आपकी उंगली का निशान आपकी पहचान बन सकता है।

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