पहाड़ों पर बर्फ गिरना जितना सुंदर दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। हर साल दुनिया के कई देशों में प्राकृतिक हिमस्खलन (Avalanche) सड़कों, गांवों और स्की रिसॉर्ट्स को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार विशेषज्ञ खुद ही पहाड़ों पर विस्फोट करके बर्फ गिराते हैं?
सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यही तकनीक हजारों लोगों की जान बचाती है। इसे Controlled Avalanche या Artificial Avalanche Blast कहा जाता है।
Avalanche आखिर होता क्यों है?
Avalanche तब होता है जब पहाड़ पर जमा बर्फ की परतें अस्थिर हो जाती हैं। बर्फ हमेशा एक जैसी नहीं होती। यह कई परतों में जमती है।
- ऊपर की परत भारी और सख्त हो सकती है।
- नीचे की परत हल्की और कमजोर हो सकती है।
जब ऊपर की भारी परत नीचे की कमजोर परत पर दबाव डालती है और संतुलन बिगड़ जाता है, तो पूरी बर्फ की स्लैब अचानक नीचे खिसक जाती है। यही हिमस्खलन है।
छोटी सी कंपन, तेज आवाज, या यहां तक कि एक स्कीयर का वजन भी इसे ट्रिगर कर सकता है।
Controlled Avalanche Blast क्या है?
Controlled Avalanche Blast एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें विशेषज्ञ जानबूझकर छोटे-छोटे विस्फोट करके बर्फ की अस्थिर परतों को पहले ही गिरा देते हैं।
इसका उद्देश्य यह है कि:
- बर्फ धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से नीचे आए
- अचानक और बड़े हिमस्खलन से बचाव हो
- सड़कों और स्की क्षेत्रों की सुरक्षा बनी रहे
छोटा, नियंत्रित हिमस्खलन हमेशा बड़े, अनियंत्रित हिमस्खलन से ज्यादा सुरक्षित होता है।
Avalanche Control कैसे किया जाता है?
हेलीकॉप्टर से विस्फोट
विशेष टीमें हेलीकॉप्टर की मदद से पहाड़ों के ऊपर उड़ती हैं और तय जगहों पर विस्फोटक गिराती हैं। इससे कमजोर बर्फ की परत तुरंत गिर जाती है।
हाथ से लगाए गए चार्ज
कुछ मामलों में प्रशिक्षित विशेषज्ञ पहाड़ पर चढ़कर विस्फोटक उपकरण खुद लगाते हैं। यह काम बेहद जोखिम भरा होता है और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी होता है।
आर्टिलरी या गन सिस्टम
कुछ देशों में दूर से तोप या विशेष लॉन्चर के माध्यम से विस्फोट किए जाते हैं। इससे टीम को सीधे खतरे में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
Gazex System
यह एक आधुनिक गैस-आधारित प्रणाली है जो पहाड़ों पर स्थायी रूप से लगाई जाती है। इसमें ऑक्सीजन और प्रोपेन गैस के मिश्रण से विस्फोट किया जाता है।
इसके पीछे का विज्ञान
Avalanche Control केवल विस्फोट का खेल नहीं है। इसके पीछे गहरी वैज्ञानिक रिसर्च होती है।
विशेषज्ञ पहले:
- Snowpack की मोटाई मापते हैं
- तापमान का अध्ययन करते हैं
- हवा की दिशा और गति देखते हैं
- बर्फ की परतों की मजबूती जांचते हैं
इसके बाद कंप्यूटर मॉडल और मौसम डेटा के आधार पर तय किया जाता है कि कहाँ और कब विस्फोट करना सुरक्षित रहेगा।
यह किन जगहों पर जरूरी होता है?
Controlled Avalanche मुख्य रूप से इन जगहों पर किया जाता है:
- पहाड़ी हाईवे
- स्की रिसॉर्ट
- रेलवे लाइन
- पर्वतीय गांव
अगर यह प्रक्रिया न की जाए तो अचानक हिमस्खलन बड़ी आपदा बन सकता है।
कौन-कौन से देश अपनाते हैं यह तकनीक?
- स्विट्जरलैंड
- अमेरिका
- कनाडा
- फ्रांस
- जापान
इन देशों में सर्दियों के दौरान नियमित रूप से Avalanche Control Operations चलाए जाते हैं।
क्या यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है?
नियंत्रित विस्फोट सीमित और सुरक्षित मात्रा में किए जाते हैं। इनका उद्देश्य बड़े नुकसान से बचाव करना होता है।
यदि Controlled Avalanche न किया जाए, तो बड़े हिमस्खलन से:
- जंगलों को नुकसान
- मानव जीवन की हानि
- सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विनाश
हो सकता है। इसलिए यह प्रक्रिया दीर्घकालीन सुरक्षा के लिए आवश्यक मानी जाती है।
Avalanche Control क्यों जरूरी है?
- मानव जीवन की सुरक्षा
- पर्यटन उद्योग की सुरक्षा
- सड़क और परिवहन व्यवस्था की रक्षा
- आर्थिक नुकसान से बचाव
यह एक प्रकार का Risk Management System है, जो प्राकृतिक आपदा को पहले ही नियंत्रित कर देता है।
निष्कर्ष
पहाड़ों की सुंदरता के पीछे छिपा खतरा हमेशा मौजूद रहता है। लेकिन आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मदद से इंसान ने प्रकृति के इस खतरे को समझ लिया है।
Controlled Avalanche Blast कोई विनाशकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुरक्षात्मक कदम है।
जब विशेषज्ञ जानबूझकर बर्फ गिराते हैं, तो वे असल में हजारों लोगों की जान बचा रहे होते हैं।
अगली बार जब आप खबरों में पहाड़ पर विस्फोट देखें, तो याद रखें—
यह आपदा की शुरुआत नहीं, बल्कि एक बड़ी आपदा को रोकने की कोशिश है।