चीन हमेशा अपने मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक है – South–North Water Diversion Project। यह प्रोजेक्ट चीन की पानी की कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया है। खासकर उत्तरी चीन, जहाँ पानी की बहुत बड़ी समस्या रही है, वहाँ तक पानी पहुँचाने के लिए यह नहर बनाई गई।
1400 किलोमीटर लंबी नहर
इस प्रोजेक्ट की Central Route हुबई प्रांत से शुरू होती है और लगभग 1400 किलोमीटर लंबी यात्रा तय करके बीजिंग तक पहुँचती है। इस नहर में बहने वाला पानी पहाड़ों और ग्लेशियरों से आता है। यही कारण है कि इसका पानी बेहद ठंडा और स्वच्छ होता है।
नहर की सबसे खास बात – लहरें
आम नहरों की तरह इसमें शांत बहाव नहीं है। इसमें पानी का फ्लो इतना तेज़ है कि लगातार तेज़ लहरें बनती रहती हैं। यह नज़ारा इतना खूबसूरत होता है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं।
क्यों बनाया गया यह प्रोजेक्ट?
चीन के उत्तरी इलाके, खासकर बीजिंग, लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे थे। यहाँ नदियाँ और झीलें बहुत कम हैं, जबकि दक्षिणी चीन में पानी की बहुतायत है। इसी असमानता को खत्म करने के लिए सरकार ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया ताकि दक्षिण का पानी पाइपलाइन और नहरों के ज़रिए उत्तर तक पहुँचाया जा सके।
इंजीनियरिंग का कमाल
इतनी लंबी नहर बनाना आसान काम नहीं था। इसमें हजारों मजदूरों और इंजीनियरों ने सालों तक मेहनत की। कई पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाया गया और बड़े पैमाने पर सुरंगें भी बनाई गईं। यह प्रोजेक्ट मानव इंजीनियरिंग की ताकत को दर्शाता है।
फायदे
उत्तरी चीन को लगातार पानी की सप्लाई मिल रही है।
बीजिंग जैसी बड़ी आबादी वाले शहर को पानी की कमी से राहत मिली।
कृषि और उद्योग दोनों को पर्याप्त पानी मिलने लगा।
आलोचना और चुनौतियाँ
हालाँकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचा सकता है। ग्लेशियर का पानी लगातार मोड़ने से दक्षिणी चीन में पानी की कमी हो सकती है और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
चीन का South–North Water Diversion Project एक ऐसा उदाहरण है जहाँ इंसान ने तकनीक और मेहनत से प्रकृति को अपने हिसाब से ढाल लिया। 1400 किलोमीटर लंबी यह नहर आज भी दुनिया के सबसे बड़े वाटर इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है।