दुनिया की 70% कॉफी ब्राज़ील में कैसे बनती है? | Coffee Production Process in Brazil – From Plantation to Cup

जब आप सुबह-सबह अपने हाथों में कॉफी का गर्म कप थामते हैं, क्या कभी यह ख्याल आया है कि यह आप तक पहुँची कैसे? उसकी यात्रा कहाँ से शुरू हुई?

दरअसल, दुनिया की करीब 70% कॉफी — चाहे सीधे या किसी रूप में — ब्राज़ील से ही आती है। कॉफी की दुनिया में ब्राज़ील एक तरह का बादशाह है, और इसका राज उसकी ज़मीन, तकनीक और विशाल फार्मों में छिपा है।

चलिए, आज कॉफी की पूरी कहानी जानते हैं — पौधे से लेकर प्याले तक की यात्रा।

ब्राज़ील — कॉफी का सुपरस्टार कैसे बना?

ब्राज़ील की धरती कॉफी के लिए मानो बनी ही है।
यहाँ की ज्वालामुखीय मिट्टी, 18°C से 25°C का समशीतोष्ण मौसम, और बारिश-धूप का बिल्कुल सही अनुपात कॉफी के पौधों के लिए आदर्श है।
यही वजह है कि यहाँ अरेबिका और रोबस्टा — दुनिया की दो सबसे लोकप्रिय किस्में — भरपूर पैदा होती हैं। आप दुनिया भर में जो सुगंधित, मुलायम स्वाद वाली कॉफी पीते हैं, वह अक्सर ब्राज़ील के अरेबिका से ही बनी होती है।

पहला चरण: खेती, जो बीज से नहीं, पौध से शुरू होती है

कॉफी का पौधा आम बीजों से नहीं उगाया जाता। पहले नर्सरी में छोटे पौधों (सीडलिंग) को 6–12 महीने तक तैयार किया जाता है, फिर उन्हें बड़े खेतों में लगाया जाता है।
इस पौधे को पहली फसल देने में 3–4 साल लग जाते हैं, मगर एक बार तैयार होने के बाद यह 20–30 साल तक फल देता रहता है। यह एक लंबी अवधि की खेती है — धैर्य का निवेश।

फसल की कटाई: हाथ या मशीन? Coffee Production Process in Brazil

जब कॉफी चेरी (फल) गहरी लाल हो जाती है, तो समझो वक्त कटाई का आ गया।
ब्राज़ील में दो तरह से कटाई होती है:

  • हाथ से चुनना (Hand Picking): सिर्फ पके हुए फल ही तोड़े जाते हैं। क्वालिटी शानदार होती है, लेकिन यह तरीका महँगा और वक्त लेने वाला है।
  • मशीन से कटाई (Machine Harvesting): बड़े-बड़े फार्मों में बड़ी मशीनें एक साथ सारे फल काट लेती हैं। यह तेज़ और किफ़ायती है — और यही तकनीक ब्राज़ील को विशाल मात्रा में कॉफी पैदा करने में मदद करती है।

प्रोसेसिंग: चेरी से बीन बनने का जादू / Coffee Production Process in Brazil

कटाई के बाद कॉफी चेरी से बीन निकालने की प्रक्रिया शुरू होती है। मुख्य रूप से दो तरीके हैं:

  • ड्राई प्रोसेस (Natural Method): फलों को सीधे धूप में सुखाया जाता है। इससे कॉफी बीन्स में मीठा, फल जैसा स्वाद आता है।
  • वेट प्रोसेस (Washed Method): मशीन से गूदा अलग किया जाता है, फिर बीन्स को पानी में किण्वन (फरमेंटेशन) के लिए रखा जाता है। इससे स्वाद साफ और हल्का रहता है।

ब्राज़ील में ड्राई प्रोसेस ज़्यादा लोकप्रिय है — और यही उसकी कॉफी के स्वाद की एक बड़ी वजह भी है।

सुखाना और छाँटना: क्वालिटी का सबसे अहम पड़ाव

बीन्स को करीब 10–14 दिन तक सुखाया जाता है, जब तक उनमें नमी 10–12% न रह जाए। फिर उन्हें आकार के हिसाब से छाँटा जाता है, खराब बीन्स अलग की जाती हैं, और एक्सपोर्ट के लायक ग्रेड तय किया जाता है। यहीं तय होता है कि कॉफी प्रीमियम ग्रेड की होगी या रेगुलर।

रोस्टिंग: वह पल जब कॉफी “कॉफी” बनती है

हरा कच्चा बीन (Green Bean) अपने आप में कोई खास स्वाद नहीं रखता। असली रंग, खुशबू और स्वाद रोस्टिंग से आता है।
हल्की रोस्ट (Light) में एसिडिटी ज़्यादा होती है, मध्यम (Medium) में संतुलन होता है, और गहरी रोस्ट (Dark) में कड़वाहट और भारी स्वाद आता है।
ब्राज़ील से ज़्यादातर कच्चे बीन्स ही निर्यात किए जाते हैं, ताकि आयात करने वाला देश अपने बाज़ार के हिसाब से उन्हें रोस्ट कर सके।

पैकेजिंग और समुद्री सफर: दुनिया के दरवाज़े तक

रोस्ट किए हुए या कच्चे बीन्स जूट के बोरों या वैक्यूम पैक में डाले जाते हैं और समुद्री जहाज़ों से दुनिया भर भेजे जाते हैं। अमेरिका, यूरोप, भारत, जापान — लगभग हर प्रमुख बाज़ार में ब्राज़ील की कॉफी पहुँच जाती है।

और आखिरकार… आपके कप तक / Coffee Production Process in Brazil

जब कॉफी आपके देश पहुँचती है, तो स्थानीय रोस्टर उसे एक बार फिर ताज़ा रोस्ट करते हैं, पीसते हैं, और फिर ब्रू करके उसे एस्प्रेसो, फिल्टर या कैपुचिनो का रूप देते हैं।

और फिर वह पल आता है — जब सुबह की धूप और हाथों में गर्म कप के साथ, ब्राज़ील की धरती से शुरू हुई वह यात्रा… आपकी पहली सिप में पूरी हो जाती है।

ब्राज़ील की कॉफी सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री है।
Plantation, मशीनरी, प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी — हर स्टेज पर ब्राज़ील ने खुद को सबसे आगे रखा है।

अगली बार जब आप कॉफी पिएँ, तो याद रखिए —
उसका सफर हज़ारों किलोमीटर दूर ब्राज़ील के खेतों से शुरू हुआ था।

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