बांग्लादेश ट्रैफिक नियम क्यों नहीं मानता? | Why Bangladesh Don’t Follow Traffic Rules?

दक्षिण एशिया का छोटा सा देश बांग्लादेश जनसंख्या के मामले में बहुत घना है। खासकर राजधानी ढाका दुनिया के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में गिनी जाती है। यहाँ की सड़कों पर जब आप बसें चलते हुए देखते हैं, तो आपको एक अजीब सा डर महसूस होगा। बसें इतनी नज़दीक-नज़दीक चलती हैं कि कभी भी टक्कर हो सकती है। यही कारण है कि अक्सर कहा जाता है—“बांग्लादेश की बसें हमेशा टकराकर चलती हैं।”

क्यों नहीं मानते ट्रैफिक नियम?

  1. यात्री बिठाने की होड़:
    यहाँ के ज्यादातर बस ड्राइवर यात्रियों को जल्दी-जल्दी बिठाने की कोशिश करते हैं। अगर सामने वाली बस ज़्यादा यात्री ले जाए, तो पीछे वाले ड्राइवर को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से वे हर हाल में आगे निकलने की कोशिश करते हैं।
  2. अनुशासन की कमी:
    ढाका और अन्य बड़े शहरों में ट्रैफिक पुलिस मौजूद जरूर होती है, लेकिन भीड़ इतनी होती है कि सभी जगह नियंत्रण पाना मुश्किल है। नतीजा यह होता है कि ड्राइवर अपने हिसाब से नियम तोड़ते रहते हैं।
  3. कमज़ोर ट्रांसपोर्ट सिस्टम:
    पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्राइवेट कंपनियों और मालिकों के हाथ में है। ड्राइवरों पर ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को लाने-ले जाने का दबाव होता है। अगर वे नियमों का पालन करेंगे तो यात्रियों की संख्या कम होगी और मालिकों की कमाई घटेगी।
  4. भीड़भाड़ और छोटी सड़कें:
    ढाका जैसी राजधानी में सड़कें संकरी हैं और गाड़ियाँ बहुत ज्यादा। इस भीड़ में ट्रैफिक रूल्स का पालन करना और भी मुश्किल हो जाता है।

क्या है ड्राइवरों का अंदाज़?

बांग्लादेश की बसों के ड्राइवर एक-दूसरे के साथ रेस लगाते हुए चलते हैं। ऐसा लगता है जैसे वे कोई प्रतियोगिता कर रहे हों। उनके लिए यह सामान्य बात है कि बसें बगल-बगल घिसटते हुए आगे बढ़ें। बाहर से देखने वालों को यह खतरनाक लगता है, लेकिन वहाँ यह रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुका है।

नतीजा – हादसे और खतरे

  • छोटे-मोटे हादसे वहाँ आम हैं।
  • यात्रियों की सुरक्षा हमेशा खतरे में रहती है।
  • ट्रैफिक जाम इतना ज्यादा होता है कि कई बार लोग घंटों फँसे रहते हैं।
  • बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वालों के लिए यह माहौल बहुत खतरनाक है।

लोग क्यों सहन करते हैं यह सिस्टम?

दरअसल, बांग्लादेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट ही सबसे सस्ता और सुलभ साधन है। वहाँ की आम जनता के पास अपनी कार या बाइक रखने का विकल्प बहुत कम है। इसलिए लोग मजबूरी में इन खतरनाक बसों में सफर करते हैं।

समाधान क्या हो सकता है?

  • सरकार को ट्रैफिक पुलिस की संख्या और सख्ती दोनों बढ़ानी होगी।
  • बस कंपनियों को यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
  • ड्राइवरों की ट्रेनिंग और नियमों का पालन अनिवार्य करना होगा।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाना होगा।

निष्कर्ष

बांग्लादेश की बसों की यह स्थिति केवल ड्राइवरों की गलती नहीं है। इसके पीछे पूरा सिस्टम जिम्मेदार है। यात्रियों की होड़, अनुशासन की कमी, कमज़ोर नियम और भीड़भाड़ मिलकर ट्रैफिक को खतरनाक बना देते हैं। जब तक सख्त नियम और सुधार लागू नहीं होंगे, तब तक वहाँ की बसें “हमेशा टकराकर चलती हैं” वाली छवि से बाहर नहीं निकल पाएँगी।

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