आजकल जब भी हम जूते खरीदने निकलते हैं, तो सिर्फ डिजाइन ही नहीं देखते – आराम, टिकाऊपन और सेहत से जुड़े फायदे भी हमारी प्राथमिकता में शामिल हो गए हैं। शायद यही वजह है कि प्राकृतिक सामग्रियों से बने जूते एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं। और इनमें सबसे खास है कॉर्क – यह अनोखी सामग्री जो सदियों से जूतों में इस्तेमाल हो रही है।
कॉर्क की खासियत क्या है? यह हल्का है, लचीला है, और सबसे अहम बात – झटकों को सोखने की इसकी जबरदस्त क्षमता इसे जूतों के लिए परफेक्ट बनाती है।
क्या है कॉर्क और कहां से आता है?
कॉर्क असल में Quercus suber नाम के एक खास पेड़ की छाल है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसे पेड़ को काटे बिना ही निकाला जा सकता है। कुछ सालों में छाल दोबारा उग आती है – यानी यह जितना प्राकृतिक है, उतना ही टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भी।
जूतों में कॉर्क का सफर: 17वीं सदी से आज तक
कॉर्क का जूतों में इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। इतिहास के पन्नों में झांकें तो पता चलता है कि 1600 के दशक में यूरोप के कारीगरों ने इसका इस्तेमाल जूतों के सोल और इनसोल में करना शुरू कर दिया था। उस जमाने में लोग पैदल ही लंबी दूरी तय करते थे, और उन्हें ऐसे जूतों की सख्त जरूरत थी जो पैरों पर दबाव न डालें। कॉर्क इस मामले में रामबाण साबित हुआ – इसकी संरचना में मौजूद हवा भरे छोटे-छोटे सेल गद्दे की तरह काम करते हैं।
धीरे-धीरे कॉर्क फुटवियर की लोकप्रियता बढ़ती गई। आज भी पारंपरिक सैंडल से लेकर एडवांस ऑर्थोपेडिक जूतों तक में इसका जमकर इस्तेमाल होता है।
क्यों फायदेमंद हैं कॉर्क के जूते?
1. झटका सोखने की क्षमता
सबसे बड़ा फायदा – कॉर्क में झटके सोखने की जबरदस्त क्षमता होती है। जब हम चलते या दौड़ते हैं तो पैरों पर लगातार दबाव पड़ता है। कॉर्क इस दबाव को कम करता है और घुटनों व कमर पर पड़ने वाले असर को भी संतुलित करता है।
2. हल्कापन और आराम
कॉर्क इतना हल्का होता है कि जूते पहनकर आपको बोझिल महसूस नहीं होगा। लंबे समय तक चलने पर भी पैरों में थकान कम होती है – यही वजह है कि ट्रैवल या रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए ये बेहतरीन ऑप्शन हैं।
3. पैर में ढल जाना
कॉर्क की एक और खूबी – यह धीरे-धीरे आपके पैर के आकार में ढल जाता है। कुछ दिन पहनने के बाद यह कस्टम-मेड जूतों जैसा आराम देने लगता है।
4. नमी और गंध से बचाव
पसीने से भीगे पैर और जूतों की बदबू – यह परेशानी कॉर्क में नहीं होती। इसमें नेचुरल नमी-रोधी गुण होते हैं, जो गर्मियों में भी इसे बेहतरीन बनाते हैं।
5. मजबूत और टिकाऊ
अच्छी क्वालिटी का कॉर्क सालों-साल चलता है। आसानी से टूटता नहीं, और रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी बरसों आराम देता है।
6. प्रकृति के लिए भी अच्छा
प्लास्टिक के इस जमाने में कॉर्क जैसी प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्री का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए वरदान है। कई बड़े ब्रांड अब सिंथेटिक पदार्थों की जगह कॉर्क को तरजीह दे रहे हैं।
कहां-कहां होता है इस्तेमाल?
आज कॉर्क का इस्तेमाल तरह-तरह के फुटवियर में हो रहा है:
- ऑर्थोपेडिक जूते
- आरामदायक सैंडल-चप्पल
- प्रीमियम ब्रांड के फुटवियर
- इनसोल और कुशन सोल
खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं – टीचर, शॉपकीपर, फैक्ट्री वर्कर – उनके लिए कॉर्क सोल वाले जूते किसी वरदान से कम नहीं।
थोड़ी सावधानी भी जरूरी
बेशक कॉर्क के बहुत फायदे हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- ज्यादा पानी में न रखें – खराब हो सकता है
- सस्ता या घटिया क्वालिटी का कॉर्क जल्दी घिस जाता है
- बहुत सख्त सतह पर लंबे इस्तेमाल से सोल पतला हो सकता है
हमेशा अच्छी क्वालिटी का कॉर्क फुटवियर ही चुनें।
आखिर में…
कॉर्क के जूते सिर्फ फैशन स्टेटमेंट नहीं हैं – ये आपकी सेहत और आराम का ख्याल रखने वाली समझदारी भरी पसंद हैं। 17वीं सदी से लेकर आज तक यह नेचुरल मटीरियल लोगों को बेहतर चलने का अनुभव दे रहा है। इसकी हल्कापन, झटका सोखने की क्षमता, टिकाऊपन और इको-फ्रेंडली होने के गुण इसे दूसरों से अलग बनाते हैं।
तो अगर आप ऐसे जूते ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक चलें, पैरों को राहत दें और प्रकृति के लिए भी बेहतर हों – कॉर्क वाले जूते आपके लिए एकदम सही विकल्प हो सकते हैं।