एरोप्लेन को वाटर सल्यूट क्यों दिया जाता है? | Why Water Salute Is Given to Aeroplane & Pilot

जब कोई विमान एयरपोर्ट पर उतरते ही दो फायर ब्रिगेड ट्रकों के बीच से गुजरता है और उस पर ऊपर से पानी की बौछार की जाती है, तो यह दृश्य बहुत खास और भावनात्मक होता है। आम लोग इसे देखकर सोचते हैं कि शायद विमान को धोया जा रहा है या ठंडा किया जा रहा है, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। इस प्रक्रिया को Water Salute कहा जाता है और यह एविएशन इंडस्ट्री की एक सम्मानजनक परंपरा है।

Water Salute क्या होता है?

वाटर सल्यूट एक सम्मान समारोह (Honor Ceremony) है, जिसमें एयरपोर्ट की फायर ब्रिगेड टीम पानी की तेज धार से विमान के ऊपर एक आर्क (मेहराब) बनाती है। यह सलामी किसी खास अवसर पर दी जाती है, जैसे:

  • पायलट की आखिरी उड़ान (Retirement Flight)
  • नई एयरलाइन या नए रूट की शुरुआत
  • किसी ऐतिहासिक या रिकॉर्ड तोड़ उड़ान पर
  • किसी खास अतिथि या विशेष विमान के स्वागत में

Water Salute की शुरुआत कब और कैसे हुई?

वाटर सल्यूट की परंपरा की जड़ें समुद्री परंपराओं (Naval Traditions) से जुड़ी हुई हैं। पुराने समय में जब कोई जहाज अपने अंतिम सफर से लौटता था या किसी बड़े कप्तान को विदाई दी जाती थी, तब जहाजों पर पानी की तोपों से सलामी दी जाती थी।
बाद में यही परंपरा एविएशन में अपनाई गई, क्योंकि एयरक्राफ्ट को भी आधुनिक युग का “आकाशीय जहाज” माना जाता है।

पायलट को Water Salute क्यों दिया जाता है?

जब कोई पायलट अपनी आखिरी उड़ान पूरी करता है, तो यह सिर्फ एक नौकरी का अंत नहीं होता, बल्कि वर्षों की मेहनत, जिम्मेदारी और हजारों यात्रियों की सुरक्षित यात्रा की कहानी होती है।
वाटर सल्यूट उस पायलट के लिए सम्मान, धन्यवाद और विदाई का प्रतीक होता है। यह बताता है कि एयरलाइन और एयरपोर्ट उस पायलट के योगदान को सलाम करता है।

क्या यह सुरक्षा या तकनीकी कारण से किया जाता है?

नहीं।
वाटर सल्यूट का किसी भी तरह से तकनीकी, सफाई या कूलिंग से कोई संबंध नहीं होता। यह पूरी तरह एक Symbolic और Ceremonial Process है।
विमान के डिजाइन और सिस्टम इस तरह बनाए जाते हैं कि पानी की हल्की-तेज बौछार से उन्हें कोई नुकसान न हो।

किन देशों में Water Salute दिया जाता है?

वाटर सल्यूट कोई एक देश की परंपरा नहीं है। यह पूरी दुनिया में मान्य है, जैसे:

  • भारत
  • अमेरिका
  • यूके
  • जापान
  • यूएई
  • यूरोपीय देश

भारत में भी इंडिगो, एयर इंडिया, विस्तारा जैसी एयरलाइंस अपने खास पायलट्स और फ्लाइट्स को वाटर सल्यूट देती हैं।

यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?

जो यात्री उस फ्लाइट में होते हैं, उनके लिए यह अनुभव बहुत खास होता है। कई यात्रियों को बाद में पता चलता है कि वे किसी ऐतिहासिक या भावनात्मक उड़ान का हिस्सा थे।
यही वजह है कि वाटर सल्यूट वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं।

क्या वाटर सल्यूट में पानी की बर्बादी होती है?

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है।
असल में, यह प्रक्रिया बहुत सीमित समय के लिए होती है और एयरपोर्ट फायर ब्रिगेड पहले से नियोजित मात्रा में पानी का उपयोग करती है। कई जगह रीसाइकल्ड या नॉन-पोटेबल पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

वाटर सल्यूट सिर्फ पानी छिड़कने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सम्मान, गर्व और भावनाओं का प्रतीक है। यह एविएशन इंडस्ट्री की उन परंपराओं में से एक है, जो इंसान और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है।
अगली बार जब आप किसी विमान को वाटर सल्यूट लेते देखें, तो समझ जाइए कि यह एक खास पल है।

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