हवाई जहाज जब रनवे पर खड़ा होता है और टेक-ऑफ के लिए तैयार होता है, तब पर्दे के पीछे कई सुरक्षा जाँचें चल रही होती हैं। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है—ईंधन (Fuel) की गुणवत्ता और मिलावट की जाँच।
यह जाँच केवल नियमों के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा के लिए अनिवार्य होती है।
विमान में कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होता है?
अधिकतर कमर्शियल एयरक्राफ्ट में Jet A-1 Fuel का उपयोग किया जाता है।
यह एक हाई-ग्रेड केरोसीन आधारित ईंधन होता है, जो:
- अत्यधिक ऊँचाई पर भी सही तरीके से काम करता है
- कम तापमान में जमता नहीं
- इंजन को स्थिर और नियंत्रित पावर देता है
इस ईंधन में थोड़ी-सी भी अशुद्धि विमान के इंजन को नुकसान पहुँचा सकती है।
फ्यूल में मिलावट या गंदगी कितनी खतरनाक हो सकती है?
अगर फ्यूल में:
- पानी
- धूल या कण
- गलत प्रकार का ईंधन
- केमिकल अशुद्धियाँ
मिल जाएँ, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं:
- इंजन फ्लेम-आउट (अचानक बंद होना)
- टेक-ऑफ के समय पावर लॉस
- इंजन में आग लगने का खतरा
- आपातकालीन लैंडिंग या दुर्घटना
इसलिए फ्यूल टेस्टिंग को कभी नजरअंदाज नहीं किया जाता।
ईंधन की जाँच कैसे की जाती है?
ग्राउंड स्टाफ और इंजीनियर फ्यूल को:
- सैंपल बोतल में निकालते हैं
- रंग और पारदर्शिता देखते हैं
- पानी की उपस्थिति की जाँच करते हैं
- फिल्टर और डेंसिटी टेस्ट करते हैं
यदि फ्यूल पूरी तरह साफ और मानकों के अनुसार होता है, तभी विमान को उड़ान की अनुमति दी जाती है।
टेक-ऑफ से पहले यह जाँच क्यों जरूरी है?
टेक-ऑफ विमान की सबसे संवेदनशील स्थिति होती है।
इस समय:
- इंजन अधिकतम पावर पर होता है
- गलती सुधारने का समय बहुत कम होता है
अगर इसी समय फ्यूल में खराबी सामने आ जाए, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए उड़ान से पहले फ्यूल चेक अनिवार्य है।
क्या पायलट भी फ्यूल चेक करते हैं?
हाँ। पायलट:
- फ्यूल क्वांटिटी
- फ्यूल बैलेंस
- फ्यूल इंडिकेटर्स
की पुष्टि करते हैं। यह प्रक्रिया ग्राउंड स्टाफ और पायलट—दोनों स्तरों पर होती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
हवाई जहाज में ईंधन की गुणवत्ता जाँचना कोई साधारण प्रक्रिया नहीं, बल्कि एविएशन सेफ्टी की रीढ़ है।
एक छोटी-सी लापरवाही सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है।
इसीलिए हर उड़ान से पहले फ्यूल टेस्टिंग को पूरी गंभीरता से किया जाता है।