स्पॉट वेल्डिंग (Spot Welding) एक खास वेल्डिंग तकनीक है जिसे रेज़िस्टेंस वेल्डिंग (Resistance Welding) भी कहा जाता है। इसमें दो मेटल शीट्स को बिना किसी अतिरिक्त वायर या रॉड के सीधे जोड़ दिया जाता है। करंट और प्रेशर की मदद से मेटल पिघलता है और ठंडा होते ही एक मजबूत और साफ Clean Joint बन जाता है।
स्पॉट वेल्डिंग कैसे काम करती है? (Working Process)
- दो मेटल शीट्स को दो कॉपर इलेक्ट्रोड्स के बीच रखा जाता है।
- इलेक्ट्रोड्स मेटल पर दबाव डालते हैं।
- कुछ ही सेकंड्स के लिए हाई करंट पास किया जाता है।
- मेटल का हिस्सा पिघलता है और आपस में जुड़ जाता है।
- ठंडा होते ही स्ट्रॉन्ग और क्लीन जॉइंट तैयार हो जाता है।
स्पॉट वेल्डिंग के फायदे (Benefits of Spot Welding)
- Clean Joint – कोई filler material की ज़रूरत नहीं, जॉइंट साफ रहता है।
- Fast Process – कुछ सेकंड्स में वेल्डिंग पूरी हो जाती है।
- Low Cost – Rod, Wire या Extra Material का खर्च नहीं।
- Automation Friendly – मशीनों और रोबोट्स से आसानी से किया जा सकता है।
- Strong Bond – जॉइंट काफी मज़बूत और टिकाऊ बनता है।
स्पॉट वेल्डिंग के उपयोग (Uses of Spot Welding)
- ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री – कार, बाइक, बस और ट्रक के बॉडी पार्ट्स जोड़ने में।
- एयरोस्पेस – एयरक्राफ्ट की मेटल शीट्स जोड़ने में।
- इलेक्ट्रॉनिक्स – बैटरी पैक और छोटे इलेक्ट्रिकल पार्ट्स वेल्ड करने में।
- होम अप्लायंसेस – फ्रिज, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव जैसी मशीनों की शीट्स जोड़ने में।
निष्कर्ष
स्पॉट वेल्डिंग एक आसान, तेज़ और कम खर्चीली वेल्डिंग तकनीक है। इसका सबसे बड़ा फायदा है कि यह Clean Joint बनाती है और इसे बड़े पैमाने पर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जाता है।